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पता नहीं ये सिर्फ मेरे फीड में हो रहा है या सभी के परंतु झूठी न्यूज़ एक अलग स्तर पर फैल रही है अब। बहुत सारे ऐसे पेजेज से पोस्ट दिखाई देतीं हैं जिन्हें मैं फॉलो नहीं करता हूँ। और उनकी पोस्ट्स साफ साफ झूठ बोल रहीं हैं, जिसका कोई आधार नहीं है। मैं ट्विटर पर इसकी अपडेट देख रहा हूं और ईरान ने कोई घोषणा नहीं की है पर इनको पता है। और ये भी साधारण झूठ नहीं है बल्कि ऐसे झूठ हैं जिन्हें हम मानने के लिए तैयार बैठे हैं। जैसे किसी भी प्रकार भारत को तेल मिले और भारत युद्ध के चंगुल में न फंसे, ऐसी मेरी इच्छा है, तो मेरे फीड में उसी प्रकार के पोस्ट दिखाई देते हैं। भारत ने जब बात की भी नहीं थी अपने जहाज़ों की सुरक्षा के बारे में, तब ही इन्होंने कह दिया कि ईरान ने भारतीय जहाज़ों को जाने दिया। तब ऑनलाइन ट्रैकर्स डिस्कस कर रहे थे कि ये परिमल भाग रहा है और पार कर चुका है। परंतु क्या उसे ईरान की सहमति थी? पता नहीं। फिर नए आयतुल्ला, नेतन्याहू के मरने की खबरें -- ताकि युद्ध खत्म हो जाए ऐसा महसूस हो -- जो सरासर झूठ है। फिर एक कोई अमेरिका रडार सिस्टम पर मिसाइल पड़ने की फोटो -- बड़ा साफ सुथरा नुकसान हुआ था, देखो साम्राज्य वादियों को मजा चखाया गया, मजेदार। कम से कम दो क्षण के लिए में पूरी तरह से स्वीकार कर चुका था। ये है शक्ति डाटा सेंटर की। स्ट्रेटेजिक टारगेट्स तो आप चिन्हित कर ही सकते हो, भावुक जनता को भी ठीक ठीक वही झूठ बोल सकते हो जो उन्हें सबसे आसानी से गुमराह करे। इस परिस्थिति में व्यक्ति सिर्फ यह नहीं सोचता कि अमुक अमुक उनके राजनैतिक विरोधी हैं बल्कि ये भी सोचते हैं कि हम जीत रहे हैं और अमुक हार रहे हैं। जिससे प्रतिद्वंदिता और व्यक्तिगत नफरत और बढ़ जाती है। दीलचसप।
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